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खाना खाने के तुरंत बाद प्रेशर आना - khana khane ke baad letrin ana

खाना खाने के तुरंत बाद प्रेशर आना - khana khane ke turant baad preshur ana



मल-में-चिकनापन-आना-mal -me-chiknapan-ana


कई बार लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद ही टॉयलेट को जाना पड़ता है जिनको यह समस्या होती है वह लोग दिन में कई बार टॉयलेट जाते हैं आमतौर पर उन्हें दिन में कई बार टॉयलेट जाना पड़ता है ! 

खाना के तुरंत बाद टॉयलेट जाने में उन्हें हर बार मल में चिकनापन पदार्थ आने की शिकायत होती है उन्हें फ्रेश होने के बाद भी ऐसा लगता है कि मल अंदर ही रह गया है !

अगर ऐसा कभी कबार होता है तो यह कोई परेशानी नहीं है  मगर ऐसा रोज होता है या फिर दिन में कई बार की समस्या है  तो आप को सावधान हो जाना चाहिए

खाना खाने के बाद लैट्रिन आने के कारण ? 


खाना खाने के तुरंत बाद पॉटी लगना या फिर खाना खाने के बाद लेट्रिन आना इस बात का संकेत है की आप के पाचनतंत्र और लीबर मे गड़बड़ है ज्यादातर लोग इस समस्या को नजरअंदाज करते हैं 

और भोजन के खेल को ना समझ कर बे अपने मनमाने अनुसार ही चलते रहते हैं एलोपैथिक डॉक्टर इस समस्या को आईबीएस नाम देते हैं आईबीएस यानी इरिटेबल बाउलसिंड्रो यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें बड़ी आंत प्रभावित होकर खाने को पचने से पूर्व ही आगे बडा़ देती है 

आपको पता होना चाहीऐ की हमारा खाया खाना अमाशय मे टूटता है और पूरा भोजन रस की तरह पतला होनेेे के बाद छोटी आंत मे जाता है इस छोटी हाथ में भी तीन द्वार है जहां पर भोजन का पूर्ण पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण होता है 

पचे हुए अवशोषण के बाद वह भाग जिनका पाचन नहीं हो पाता है वह बड़ी आत में चला जाता है जहां पर बडी आंत उसमें से पानी अवशोषित कर लेती है जहां पर पानी के अवशोषण के बाद भोजन अरधठोस  हो जाता है और बड़ी आंत में जाकर माला से में इकट्ठा हो जाता है 

अब आईबीएस जिसे आयुर्वेद में संग्रहणी रोग कहा जाता है। इसमें हमारे द्वारा होने वाली खानपान की गड़बड़ और अनियमितता के कारण भोजन को पचाने वाली अग्नि बिगड़ जाती है अग्नि से तात्पर्य भोजन को पचाने वाले पाचक रस और एंजाइम से है 

क्योंकि यह समस्या में ठीक से नहीं बनते और भोजन छोटी आत में पड़ा पड़ा सड़ जाता है या विकृत हो जाता है जिसके कारण आओ का निर्माण ज्यादा होता है और यह वही माल के साथ चिकने पदार्थ के रूप में निकल जाता है और यह आईबीएस के रोग में आम बात है 

यदि ऐसा चलता रहा तो आओ या जिसे हम कच्चा रस कहते हैं शरीर के हर हिस्से में जाकर जमने लगता है जो यूरिक एसिड के लाता है जिसके कारण जिसके कारण शरीर में गठिया जैसे रोग उत्पन्न होने लगते हैं एक बार पुनः ध्यान दें शरीर में

1. खून
2. रस
3. मांस
4. मेद
5. मज्जा
6, वीर्य
7. आस्थी

इन सब धातुओं में से पहली  रस धातु का पाचन ठीक तरह से नहीं हो पाता है तभी शरीर में आम बात का निर्माण होता है और यह सब शरीर की अग्नि बिगड़ जाने के कारण होता है जिसमें आम बात तो है ही पर आयुर्वेद में बताए गए 14 प्रकार के बेगों को 

1. बेगों को रोकने से भी अग्नि बिगड़ जाती है जिसमें 
2. मल बैग को रोके रखना पेशाब लगने पर भी नहीं जाना
3. नींद आने पर भी नहीं सोना
4. छींक को रोकना
5. उबासी को रोकना
6. उल्टी को रोकना
7. अपान वायु को रोकना शर्म की वजह से
8. वीर्य के वेग को रोकना

इसी प्रकार से 14 प्रकार के बैग आयुर्वेद में बताए गए हैं
जिन्हें रोकना बीमारी को नेवता देने जैसा है
जिन्हें संग्रहणी समस्या है उन्हें सबसे पहले अपने खानपान यानी खाने को खाने की गलतियों को सुधारना होगा
संग्रहणी कोई रोग नहीं है यह आपके खानपान और दिनचर्या की वजह से होता है इसमें आपको खान-पान का ध्यान रखना है जो पेज के अंत में बताया जाएगा
उससे पहले आप जान लीजिए संग्रहणी चार प्रकार की होती है
और चारों में आयुर्वेद अलग-अलग सलाह देता है
जब तक आपको संग्रहणी के चारों प्रकार ठीक से नहीं पता होंगे तो इसका उपचार नहीं हो सकता तो चलिए जानते हैं इनके बारे में

1. पहली है वातज संग्रहणी 


इसमें व्यक्ति का भोजन पूरी तरह से नहीं पच पाता
गला सूख जाता है 
भूख और प्यास अधिक लगती है
कान पसली पेडू़ आदि में दर्द रहता है
रोगी के मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है
मिठाई खाने की अधिक इच्छा होती है
बार-बार दस्त लग जाता है
यह समस्याएं उन लोगों को होती हैं जो बादी वाला भोजन अधिक करते हैं बादी से तात्पर्य ऐसी चीजों से है जिन्हें खाने से शरीर में गैस बनती है इसके साथ ही जो मैथुन अधिक करता है

2. दूसरी है पित्त की संग्रहणी


इसमें व्यक्ति को नीले पीले दस्त आते हैं
खट्टी डकार आती है
छाती व गले में जलन होती है 
खाना खाने का मन नहीं करता
और प्यास अधिक लगती है ऐसा उन व्यक्तियों के साथ होता है जो अधिक मिर्च मसालेदार भोजन करता है गर्म चीजों का सेवन करता है तीखी बा खट्टी चीजों का सेवन करता है उसे नीले पीले कच्चे दस्त की समस्या होती है

3. तीसरी है कफज संग्रहणी


इसमें व्यक्ति को बार बार उल्टी आती है उल्टी के साथ बार-बार उपके आते हैं
बार बार खांसी के दौरे पड़ते हैं और यह संग्रहणी उन लोगों को होती है जो चिकनी तली और भारी चीजों का सेवन  अधिक करते हैं और जो सेवन करने के बाद तुरंत सो जाते हैं
जिसके कारण खाया हुआ पदार्थ पूरी तरह से बच नहीं पाता
ऐसे में रोगी को दस्त के साथ आव भी आने लगता है

चौथे और आखिरी संग्रहणी बचती है

4. चौथी है सन्निपातज संग्रहणी 


इस संग्रहणी में पहले के तीनों लक्षण पाए जाते हैं इस संग्रहणी सभी लक्षण दिखाई देते है 
जैसे मल झाग दार और शरीर पतला हो जाता है 
जीव होंट गाल लाल हो जाते हैं इस रोग में भोजन के अनुपात में मल अधिक आता है भोजन करने के तुरंत बाद ही तेज़ दस्त लग जाता है खून की कमी हो जाती है पेट में गड गड़ाहट होती है और मुँह छाले हो जाते है और कमर में दर्द भी होता है 

उपचार - 

इन चरो तरह की संग्रहणी में  सामान बात जो ध्यान रखना चाहिए वह है की मिर्च मसालेदार , चटपटी , कड़वी तथा सख्त चीजें बिलकुल न खाएं साथ मैदें से बानी चीजे जिसमे पानी मात्रा न हो जैसे बिस्किट, नमकीन, चिप्स, तोस आदि इन सब को दूर से ही प्रणाम करें और भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करें जिससे बिगड़ी हुई अग्नि पुनः ठीक हो जाये उसके लिए आप सबेरे सबेरे फ्रेश होने के बाद पपीता , अमरुद  या पके वील का गुदा या सीताफल , केला ,संतरा , निम्बू का रस लें 
सब्जियों में लोंकी , तुरई , मेथी , परमल , पालक , गाजर आदि सेबन करें अधिक मात्रा में ! 
और भोजन करने के लगभग ३० मिनट पहले हर रोज सलाद का सेबन जरूर करें 

आगे बताये गए प्रयोग से संग्रहणीयों से छुटकारा पा सकते है 

आपको ऐसे प्रयोग बताएँगे जिन्हे आप आसानी से घर पर ही कर सकते है 

पेट की अग्नि को बढ़ाने के लिए बेल फल का प्रयोग करना चाहिए बेल का फल जो शिवरात्रि में भगबान शिव की अर्पित किया जाता है क्युकी यह फल आपके शरीर के विषक्त पदार्थ को बहार करता है यह फल पाचन के लिए सही ओषधि है इस फल का उपयोग एक स्वस्थ्य व्यक्ति को भी करना चाहिए इसका उपयोग आप सरवत बना कर भी कर सकते है !

बेल फल का सरवत का सेवन करने से जल्द ही आव दस्त और सभी प्रकार का संग्रहणी ठीक हो जाते है 
इस फल के सेवन के अलावा भी बहुत से उपचार जिनको करने से बिगड़ी हुई अग्नि को ठीक किया जा सकता है !

पहला उपाए - आम के ५० मिलीलीटर ताजे रास में २५ ग्राम मीठा दही तथा १ चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलकर दिन में २ से ३ बार लेने से कुछ ही दिन पुराने से पुराने संग्रहणी रोग ठीक हो जाते है  

और एक महत्वपूर्ण बात जो मानव को अपने जीवन में हमेशा ध्यान रखना चाहिए की मानव सच्ची भूक यानि कड़क भूक दिन में दो २ बार ही लगती है इसलिए मानव की में कुछ भी और कभी भी नहीं खाना चाहिए जब आपको अधिक भूक लग रही हो तभी खाये और एक हमेशा ध्यान रखे की अधिक मात्रा में खाया भोजन किसी काम का नहीं होता है 

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2 Comments

  1. अरे भाई एक ही भाषा का प्रयोग करो

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