पेट में जलन और भारीपन की समस्या Problems of stomach irritation and heaviness
इस समस्या के समाधान से पहले हमे यह समझने की आवस्यकता की ऐसा क्यों होता है यदि हमे समस्या समझ आ जाती है तो उसका समाधान भी आसान हो जाता है
तो आइये इस प्रक्रिया को समझते है
अक्सर हमें खाना खाने के बाद पेट में जलन या भरी पन लगता है कभी कभी यह जलन डकार के रूप मे बहार आती है जिससे मुँह में खट्टा खट्टा मेहसूस होता है खट्टी डकार के साथ कई बार हमें गले में जलन महसूस होती ! ज्यादातर लोग इसे नज़र अंदाज करते है और कई लोग Teblet दवाई का प्रयोग करते है
इसलिए ताकि उनके पेट में इसलिए ताकि उनके पेट में जलन न हो एसिड रिफ्लेक्ट दिखने में एक सामन्य समस्या लगती है पर यह छोटी सी दिखने वाली समस्या को अनदेखा करने से यह आपको आगे जाकर कई प्रकार के रोगों जैसे - अल्सर खून की बीमारिया जैसे हाई बीपी कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक आदि रोगो को न्योता देती है
आप इसे बीमारी होने का पहला चरण भी कह सकते है क्युकी यही से रोगो की शुरुआत होती है जीहा और आज लगभग हर दूसरे तीसरे व्यक्ति को यह समस्या आम हो गई है टीवी चेनलो के माध्यम से ढेरों एन्टासिट (दवाइयां) के विज्ञापन हमे दिखाये जाते है
तांकि हम इनका उपयोग करे और इनकी दवा के आदि हो जाए आपको जानकर हैरानी होगी की दवाओं के बाजार में एन्टासिट बेस्ट शेलर रेट में हमेशा दूसरे या तीसरे स्थान पर रहते है अकेले केवल अमेरिका की बात करे तो वहाँ इसका व्यापर लगभग 14B डॉलर का है
याने इंडियन रूपीस में देखे तो लगभग १ लाख करोड़ रूपए से भी ज्यादा जो भी लोग पेट में जलन या खट्टी डकार आने के कारना एन्टासिट का प्रयोग करते है उसका आदि होना ही पड़ता है और जो व्यक्ति लम्बे समय तक इसका सेवन करते है उनकी रोग प्रतिरोधक छमता भी कम होने लगती है
जिसके कारन व्यक्ति को बार बार शर्दी खांसी बुखार की समस्या होती है मेडिकल की भाषा में एन्टासिट को प्रोटोन पंप Inhibitr bpi कहते है इसका कार्य पेट में जाकर एसिड बनाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करके कोशिकाओं को (Acide )एसिड को ही बनाने से रोकती है
जबकि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए क्योकि एसिड की वजह से ही हमारा खाना पचता है ऋषि मागपंड जी ने कहा है यदि आपकी जठराग्नि अगर मंद पड़ गई तो आपका खाना पच नहीं सकता है वह जठरागिनी और कोई नहीं एसिड ही है जिसे हम एच सी एल HCL ह्य्द्रोक्लोरिक एसिड कहते है
यह एसिड इतना तीव्र होता है की अगर आप इसमें लोहे या स्टील की कोई भी वस्तु दाल दे तो यह उसे थोड़ी ही देर में गला देगा यह पेट्री एसिड जितना ही तेज होता है असल में यही हमारे भोजन को तोड़ता है और उसका रस बनाकर छोटी आंत में भेजता है आप सोच रहे होंगे की ?
अगर ये इतना तीव्र है तो हमारी आंतें अब तक इससे सुरक्षित क्यों है दरअसल यह हमारे अंदर इसलिए आराम से बना रहता पाता है क्युकी हमारे पेट में म्यूकस की एक खास परत होती है जिससे हमारी आंते सुरक्षित रहती है यह एसिड हमारा खाना पचाने के अलावा अनगिनत बेक्टेरिया और वायरस को भी नस्ट करता है
अब आप खुद सोचिये की जब एसिड का उत्पादन ही कम होगा तो बेक्टेरिया और वायरस पूरी तरह से नस्ट नहीं होंगे और इसी कारन से बार बार व्यक्ति सादी खांसी बुखार की चपेट में आते-रहते है यह अभी हमने उन लोगो की बात की है जो एसिडिटी होने पर एन्टासिट खा रहे थे कई लोगो को खाना खाने के बाद एसिडिटी होती है तो कई लोगो को खली पेट एसिड बनता है
समाधान
खाना खाने के बाद भी जिनको एसिड की समस्या हो रही है गले या छाती में जलन खट्टी डकार पेट में भारीपन लगता है तो उन्हें एन्टासिट खाने की आवयसकता नहीं है
बल्कि भोजन करने की प्रक्रिया को समझने की आवयसकता है हमारे पेट में हमे दो तरह से जलन महसूस होती है एक तो भोजन करने के बाद अमास्ये में और दूसरा डकार आते वक्त भोजन नली में जलन महसूस होती है
साथ ही खट्टा खट्टा भी लगता है यह जलन दो कारणों से होती है जिसमे सबसे बड़ा कारन है ज्यादा खाना खाने से या खाना खाते ही लेट जाने से यह है
आपकी आमास्य का साइज आपकी मुठ्ठी जितना होता है इस मुठ्ठी जितने आमास्य में हमारा भोजन पहुँचता है और इसका आकार से चार गुना बढ़ सकता है यानी रबर की तरह फेल सकता है
हमारा आयुर्वेद हमे यह सिखाता है की आमास्य आधा भोजन से भरने के बाद उसे पचाने के लिए आमास्य एक चौथाई भाग पछ्यक्रस याने एच सी एल एसिड से बढ़ता है और एक चौथाई भाग खली रहता है
तांकि इसमें मंथन क्रिया हो सके हमारी गलती यह होती है की हम आमाशय को भोजन से पूरा भर लेते है
दरअसल आपके आमाशय के साइज के अनुसार आपको कितना भोजन अंदर भेजना है इसका सन्देश हमारा शरीर डकार के जरिये देता है जिसे हम नजर अंदाज कर देते है
हमारे ऋषियों ने तीन से चार डकारों के बारे में पहले ही बता रखा है
१. तृप्ति डकार
२. पूर्ण डकार
३. खट्टी डकार
४. भूख डकार
खट्टी डकार क्यों आती है
ऐसी स्तिथि में जब हमे डकार आती है तो मुँह में खट्टा खट्टा लगता है और गले में जलन महसूस होती है यह एक एसिडिटी हो गई दूसरी कंडीसन में एसिड आमाशय में पहुंच जाता है
पर भोजन को पचाने के लिए उसमे मंथन क्रिया नहीं हो सकती ठीक ऐसे ही जैसे हम मुँह को पानी से पूरा भरले ऐसी स्तिथि में हम कुल्ला नहीं कर सकते अब क्या होगा की जो आपने खाया वो सिर्फ और सिर्फ अंदर ही 4 से 5 घंटे तक पड़ा रहता है
बिना किसी प्रतिक्रिया के इस परिस्थिति में पेट भरी लगेगा और पेट में जलन होगी इसी को अपच कहते है
यानी खाया गया भोजन पचता नहीं है और अपच होने पर ही कब्ज होती है अब काफी लोग कहेंगे की हम तो कम ही खाते है फिर भी हमे पेट में जलन महसूस होती है इस स्तिथि में ज्यादातर मामले भोजन में एसिडिक चीजे खाने से होता है
हमारे शरीर में जो भोजन को पचाने के लिए जो एसिड बनता है वो तो है ही इसके अलावा हम भारी रूप से भी भोजन के माध्यम से अम्ल और झार शरीर को देते है शरीर में इसकी मात्रा २० प्रतिशत एसिड और ८० प्रतिशत छार ऐल्कलाइन शरीर इसकी मात्रा का वेलेन्स बनाये रखने के लिए रात दिन लगा रहता है
लेकिन अगर आप बहार से अल्कोहल सोड़ा वाइड ब्रेड सफेद शक्कर से बनी हुई कोई भी मिठाई सफ़ेद नमक, नूडल,कुकीस मांस केन्डी बर्गर कोई भी फ़ास्ट फ़ूड अपने अंदर डालते है
तो यह अंदर एसिड को बढ़ाएगा ही इन सबकी पी ७ से कम होती है ७ से कम वेल्यू वाली चीजे एसिडिक और ७ से ऊपर वाली चीजे छारी एल्केलाइन वाली होती है
आपके खाने में कोनसी चीजे छारी है और कोनसी चीजे अम्लीय है यह हमने एक अलग ही पोस्ट बनाई है अगर आपको खाली पेट एसिड बनता है तो उसे नूट्रल करने लिए आप छारी खाये आप नारियल पानी भी पी सकते है या आधा चम्मच जीरा कच्चा ही चवा चवा कर खा जाए और दस मिनट बाद एक गिलास गुनगुना पानी पी ले स्वाद में ये कड़वा जरूर लगेगा पर ये तुरंत काम करता है इसके अलावा पेट में होने पर खाने के बाद गुड़ जरूर खाये गुड़ को खाना नहीं है बल्कि इसके रस को चूसना है इससे पेट की पाचन शक्ति बढ़ती है और जलन की समस्या ख़तम हो जाती है
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